الكيمياء العامة/مقدمة لنظرية الكم

ميكانيكا الكم هي مجموعة من النظريات الفيزيائية التي ظهرت في القرن العشرين، وذلك لتفسير الظواهر على مستوى الذرة والجسيمات دون الذرية وقد دمجت بين الخاصية الجسيمية والخاصية الموجية ليظهر مصطلح ازدواجية الموجة -الجسيم، وبهذا تصبح ميكانيكا الكم مسئولة عن التفسير الفيزيائي على المستوى الذري كما أنها أيضاً تطبق على الميكانيكا الكلاسيكية ولكن لاتظهر تأثيرها على هذا المستوى، لذلك ميكانيكا الكم هي تعميم للفيزياء الكلاسيكية لإمكانية تطبيقها على المستويين الذري والعادي. تسميتها بميكانيكا الكم يعود إلى أهميّة الكم في بنائها (وهو مصطلح فيزيائي يستخدم لوصف أصغر كمّية من الطاقة يمكن تبادلها بين الجسيمات، ويستخدم للإشارة إلى كميات الطاقة المحددة التي تنبعث بشكل متقطع، وليس بشكل مستمر). كثيرا ما يستخدم مصطلحي فيزياء الكم والنظرية الكمية كمرادفات لميكانيكا الكم. وبعض الكتّأب يستخدمون مصطلح ميكانيكا الكم للإشارة إلى ميكانيكا الكم غير النسبية.

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اكتشاف الكمعدل

تأتي اشكاليات أخرى من فهم طبيعة الضوء ففي حين يؤكد نيوتن أن طبيعة الضوء جسيمية (فهو مؤلف من جسيمات صغيرة، وتؤيده في ذلك العديد من التجارب، نجد أن توماس يونغ (عالم) يؤكد أن الضوء ذو طبيعة موجية وتؤكد تجربة شقي يونغ حول تداخل وحيود الضوء هذه الطبيعة الموجية، وفي عام 1924 اقترح لويس دي بروي أن ينظر إلى جسيمات المادة وذراتها أيضا على أنها جسيمات تسلك سلوكا موجياً أحيانا مقترحاً معادلة تشابه معادلة بلانك :

.

حيث : λ, طول الموجة، وp كمية الحركة.

بدأت هنا تتضح ملامح صورة جديدة للعالم تتداخل فيها الطبيعة الجسيمة والطبيعية الموجية للجسيمات الدقيقة بحيث يصعب التمييز بينهما وكان هذا ما مهد الطريق لظهور ميكانيك الكم عندما وضع نيلز بور نظرية عن تصور تركيب الذرة التي لاتسمح للاندفاع الزاوي بأخذ قيم سوى المضاعفات الصحيحة للقيمة :

عندما تصدم الفوتونات معدن، يتم تحرير الإلكترونات. التأثير الكهروضوئي يعتمد فقط على تردد الضوء، وليس كثافة، الذي يتحدى سلوك الموجة.

حيث تعبر عن قيم الاندفاع الزاوي ، عدد صحيح (3,2,1,...)

و هكذا ظهرت مستويات للطاقة المستقرة يمكن وضع الإلكترونات الدائرة فيها مفسرة ثبات التركيب والخطوط الطيفية للذرات، لكن هذا لم يكن سوى البداية. في عام 1927 قام العالم الألماني هايزنبرغ بتقديم مبدأ عدم التأكد الذي ينص على عدم قدرتنا على تحديد موضع وسرعة الجسيمات الكمية بآن واحد وبدقة متناهية. كانت هذه بداية سلسلة من الصدمات التي تلقتها نظرتنا الكلاسيكية للعالم والتي تحطمت معها كل الصورة الميكانيكية الآلية التي سادت حول العالم بعد إنتصارات فيزياء نيوتن المدوية في القرنين السابقين. قام هايزنبرغ بصياغة قواعد ميكانيكا الكم بصياغة جبر المصفوفات فيما عرف بعد ذلك بميكانيكا المصفوفات سنة 1926، ظهر شرودنجر بمعادلته الموجية الشهيرة التي تبين تطور دالة موجة الجسيم الكمي مع الزمن وعرفت تلك الصياغة بالميكانيكا الموجية، لكن رغم الاختلاف الظاهري العميق بين الصياغتين فان نتائجهما كانت متطابقة، هذا ما دفع بول ديراك بعد ذلك لتوحيدهما في اطار شامل عرف بنظرية التحويل.[1]

  1. http://plato.stanford.edu/entries/qm/ ميكانيكا الكم (موسوعة ستانفورد للفلسفة)